Wednesday, 7 October 2020

जिसकी लाठी...

.      *जिसकी लाठी...*
आजकल मिडिया से
मुझे कंपुशाही की दुर्गंध
झेलनी पड़ रहीं है
आपका अनुभव
अलग नहीं होगा

लोग आशय या विषय-वस्तू नहीं, 
बल्कि रचैता का नाम देखकर
बिना पढ़े देते हैं दाद

"वाह ! वाह !!
सुभानल्लाह !!!
बहोत खूब !!!!
क्या लफ्ज़ हैं !!!!!"

तब मैं नहीं बहाता आँसू
क्योंकि मुझे मालूम है
जिसकी लाठी उसकी भैंस
                      *©रमेश*

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