. *जिसकी लाठी...*
आजकल मिडिया से
मुझे कंपुशाही की दुर्गंध
झेलनी पड़ रहीं है
आपका अनुभव
अलग नहीं होगा
लोग आशय या विषय-वस्तू नहीं,
बल्कि रचैता का नाम देखकर
बिना पढ़े देते हैं दाद
"वाह ! वाह !!
सुभानल्लाह !!!
बहोत खूब !!!!
क्या लफ्ज़ हैं !!!!!"
तब मैं नहीं बहाता आँसू
क्योंकि मुझे मालूम है
जिसकी लाठी उसकी भैंस
*©रमेश*
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