*चने फुटाने(छोले)*
जो लोग देश को नहीं बेचना चाहते
वे शहर के फुटपाथों पर
चने-फुटाने(छोले) बेचकर गुजारा करते हैं
वे नहीं करते
संसदीय वल्गना
श्रम शक्ति से पसीना निचोडकर
पुरख़ो द्वारा दिखाए गये
कठिन रास्ते पर जाते हैं
इज्जत की छाल को
टुकडे जोड-जोडकर
उनकी जिंदगी बनता है शिकार
समाज के सबसे हीन पंथियोंकी
हमेशा के लिए
सत्ता में अपने दुश्मनों के साथ
वे नहीं कर सकते
अस्तित्व की गांठों को
सुलझाने के लिए
लेन-देन का सीधासाधा खेल
इतिहास की बाढ़ से बहते आए
आजादी नामक बर्तन में
नहाने के बाद
उनकी त्वचा अधिक खुरदरी बन गई है
लोकतंत्र के सभी रोग
बगल में चिपके है किलनिया बनकर
वे खुजलाते हैं बगलाएं
असहायता से और जाते हैं
मंदिर मस्जिद में
खुली आँखों से
सब कुछ देख रहे
अल्लाह से दुआ मांगने
पेट का ड्रैगन भरने के वास्ते
वे करते हैं
फिर से मतदान
एक अत्याचारी शासन को उखाड़कर
दूसरे अत्याचारी शासन को चुनकर
बिठाते हैं अपने माथे पर
राज करने
जो पहले की तुलना में
अधिक हिंसक रूप से
व्यवहार करते हैं
उनकी रोजी-रोटीसे
अनिद्रा अपनाने
बिके नही जाते चिरिमिरी को
और खरगोश का दिल होनेसे
नाखून लगाकर
किलनीयों को हटा नही सकते
केवल फुटपाथ पर अपना बाजार
को अवरुद्ध करते हैं
हाईवे पर
अगर पेट भरने जाएंगे
तो कुचले और मरोड जाने का डर है
संविधान की बेडियोंमे
बंधे जाने के कारण
होशियारी के मार्ग से
अपनी भूख को मिटाकर
दमन प्रणाली के शरण में जाकर
फुटपाथों पर
चने-फुटाने(छोले) बेचकर गुजारा करते हैं
© रमेश कुरलीकर
मूळ मराठी-साईनाथ पाचारणे
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