बोलकी घटना अशी की विसरता न ये कदा भावना उत्कट हवी तीज कोंडता नये कदा नेमक्या शब्दांत गुंफण वृत्त-अलंकारयुक्त राहते हृदयांतरी ती भावते कविता सदा *© रमेश*
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