Sunday, 27 October 2019

जब तक

जब तक
जलते रहेंगे चांद-सूरज
दुआओं के
अपने दिलों में

और नदियां स्नेह की
बहती रहेंगी खून में

ना भूलेंगे
भूलके भी
हम सभी को

याद हो
या ना हो
मगर सपनों में भी
याद रखेंगे
आप सांसों में जो
बैठ गए हो

इस दीवाली के
उपलक्ष्य में और कुछ
दे सके-ना सके
शुभ कामनाएं
भेज रहा हूँ
इन चंद पंक्तियोंके जरिए

स्वीकार तो
करना ही होगा
नही तो हमें अपनाने में
अापकी बहुत बडी भूल
महसूस होगी

             *चाँद परछाई*

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